साहित्य और विद्वान

गोनू झा

राजा हरिसिंहदेव के दरबार के महान विदूषक और मंत्री। उनकी चतुराई और तीक्ष्ण हास्य की कथाएँ मिथिला की मौखिक परंपरा का अभिन्न अंग हैं।