मिथिला धरोहर: विरासत और स्मारक

बिसफी

📍 Mithila

बिसफी

मधुबनी जिले में स्थित बिसफी गाँव मैथिली साहित्य के सूर्य, महाकवि विद्यापति की जन्मस्थली होने के कारण हर मैथिल के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल है। १४वीं शताब्दी के इस महान कवि, जिन्हें 'मैथिल कोकिल' कहा जाता है, ने इसी मिट्टी में जन्म लेकर अपनी कालजयी रचनाओं से भारतीय साहित्य को समृद्ध किया। बिसफी केवल एक गाँव नहीं है, बल्कि यह उस युग का प्रतीक है जब साहित्य और भक्ति का अद्भुत संगम हुआ था। प्राचीन कथाओं के अनुसार, विद्यापति की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव स्वयं उनके घर 'उगना' नामक नौकर बनकर सेवा करने आए थे। गाँव में कवि की स्मृति को समर्पित एक स्मारक और पुस्तकालय है, जहाँ उनकी पांडुलिपियों और जीवन से जुड़ी वस्तुओं को सहेजने का प्रयास किया गया है। हर साल यहाँ विद्यापति पर्व समारोह का आयोजन होता है, जिसमें देश-विदेश के साहित्यकार और कलाकार जुटते हैं। बिसफी की यात्रा करना विद्यापति के उन पदों को महसूस करने जैसा है जो आज भी मिथिला के हर घर और हर उत्सव में गूँजते हैं।

योगदानकर्ता

✍️Mithilalegacy Team

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