शक्ति पीठ (आध्यात्मिक केंद्र)

नवादा भगवती स्थान (हयहट्टा)

📍 दरभंगा, बिहार, भारत

नवादा भगवती स्थान (हयहट्टा)

नवादा भगवती स्थान, जिसे स्थानीय स्तर पर 'हयहट्टा सिद्धपीठ' के रूप में जाना जाता है, दरभंगा के सबसे प्राचीन और जागृत शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने शिव के वैराग्य को समाप्त करने के लिए सती के मृत शरीर को अपने सुदर्शन चक्र से खंडित किया था, तब देवी सती का 'बायां कान' (कर्ण) इसी स्थान पर गिरा था। हयहट्टा नाम का संबंध संभवतः प्राचीन अश्व-बहार (घोड़ों के बाजार) से है, जो इस क्षेत्र के व्यापारिक महत्व को दर्शाता है। मंदिर में माँ भगवती की एक अत्यंत तेजस्वी मूर्ति है, जिनके दर्शन मात्र से भक्तों के हृदय में असीम शांति का संचार होता है। इस मंदिर की गणना मिथिला के प्रमुख तांत्रिक केंद्रों में की जाती है, जहाँ 'महानिशा पूजा' अत्यंत विधि-विधान से मनाई जाती है। राज दरभंगा के समय से ही इस मंदिर को विशेष राजकीय संरक्षण प्राप्त था। यहाँ की परंपरा है कि किसी भी शुभ कार्य से पहले लोग माँ नवादा भगवती का आशीर्वाद लेने आते हैं। मंदिर परिसर का आध्यात्मिक वातावरण और यहाँ गूँजते 'माँ' के जयकारे भक्तों को एक दिव्य अनुभूति कराते हैं, जो सदियों से इस क्षेत्र की रक्षा कर रही हैं।

योगदानकर्ता

✍️Mithilalegacy Team

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