ज्ञानक उद्गम स्थल
मिथिला: न्याय, तर्क आ मीमांसा क प्राचीन राजधानी।
न्याय शास्त्र (तर्कक विद्यालय)
महर्षि गौतम द्वारा मिथिला मे स्थापित, न्याय शास्त्र भारतीय दर्शनक छः मुख्य धराग मे सँ एक अछि। ई दुनिया क तर्क, शास्त्रार्थ आ प्रमाणक नियम सीखौलक।
मिथिलाक विद्वान
याज्ञवल्क्य
ऋषि सबहक सिरमौर। राजा जनकक दरबार मे बृहदारण्यक उपनिषद मे हुनकर संवाद वेदांतक आधार थिक।
गार्गी वाचक्नवी
वैदिक विदुषी जे याज्ञवल्क्य कें शास्त्रार्थ मे चुनौती देलनि। ओ प्राचीन मिथिला मे नारीक विदुषिताक प्रतीक छथि।
मैत्रेयी
एकटा महान दार्शनिक, जे 'अमृतत्व' (अमरता) क खोज मे याज्ञवल्क्य सँ संवाद कएलनि।
पंजी प्रबंध
14म शताब्दी मे राजा हरिसिंहदेव द्वारा शुरू कएल गेल वंशावली प्रणाली। ई समगोत्री विवाह सँ बचबाक लेल एकटा वैज्ञानिक व्यवस्था छल, जे आई धरि चलि रहल अछि।