मिथिलाक पावनि-तिहार
मिथिलाक पंचांग भक्ति, प्रकृति पूजा आओर सामाजिक संबंधक एकटा अनूठा संगम थिक। हर मौसम उत्सव मनाबय लेल एकटा कारण लय क' अबैत अछि।
जुड़ शीतल
मैथिली नव वर्ष, जाहि में गाछ-बिरिछ में पानि देल जाइत अछि आओर बासी भात (बासी पौआ) खाएल जाइत अछि।
विस्तार सँ पढ़ू →बट सावित्री
अहि पावनि में सुहागिन महिला सब अपन स्वामीक दीर्घायु लेल बरगद गाछक पूजा करैत छथि।
विस्तार सँ पढ़ू →मधुश्रावणी
नवविवाहिता लेल 13 दिनक पावनि, जाहि में मैना-पंचमी आओर विषहरक पूजा होइत अछि।
विस्तार सँ पढ़ू →छठि पावनि
मिथिलाक सभ सँ पैघ पावनि, जे सूर्य देव आओर छठी मैया कऽ समर्पित अछि।
विस्तार सँ पढ़ू →सामा चकेवा
भाइ-बहिनक प्रेम कर प्रतीक, जाहि में लोक गीत आओर माटिक मूर्ति बना कऽ खेलल जाइत अछि।
विस्तार सँ पढ़ू →विवाह पंचमी
सिया-पिया (सीता-राम) के विवाहक उत्सव, जे जनकपुर में धूमधाम स मनाओल जाइत अछि।
विस्तार सँ पढ़ू →कोजागरा
शरद पूर्णिमा कऽ दिन मनाओल जाय बला पावनि, जाहि में नव-विवाहित वर कऽ चुमाओन होइत अछि।
विस्तार सँ पढ़ू →जानकी नवमी
जगजननी जानकी (सीता) कऽ प्राकट्य दिवस।
विस्तार सँ पढ़ू →तिल सकरात
सूर्य कऽ उत्तरायण होमय पर तिल-गुड़ आओर दही-चिवड़ा खाएल जाइत अछि।
विस्तार सँ पढ़ू →सरस्वती पूजा
विद्याक देवी सरस्वतीक आराधना। बसंत ऋतुक नूतन उत्साह।
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